हॉरर और कॉमेडी के कॉकटेल से भरपूर राजकुमार राव ( ) और श्रद्धा कपूर ( ) स्टारर फिल्म 'स्त्री ( )' ने बॉक्स ऑफिस पर खासा पकड़ बना रखी है. वीकएंड के बाद वीकडे पर भी फिल्म ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है. बॉक्स ऑफिस इंडिया के आंकड़ों
के मुताबिक, मंगलवार को फिल्म ने 5.75 करोड़ रुपये का बिजनेस किया है. जो
फिल्म के ओपनिंग डे कलेक्शन से महज 15% कम रहा है. सोमवार को फिल्म को
जन्माष्टमी की छुट्टी की फायदा मिला और इसने 8.50 करोड़ रुपये बटोरे .
मालूम हो कि, 'स्त्री' ने रिलीज के पहले दिन 6.65 करोड़, शनिवार को 10.50 करोड़, रविवार को फिल्म के कलेक्शन में भारी उछाल देखने को मिली और इसने 14.25 करोड़ रुपये बटोरे. पहले वीकएंड पर फिल्म ने 31.40 करोड़ रुपये का कारोबार किया और सोमवार को इसकी कमाई 8.50 करोड़ रुपये रही और मंगलवार को फिल्म के खाते में 5.75 करोड़ रुपये आए. फिल्म शुरुआती 5 दिनों में 47 करोड़ रुपये का बिजनेस कर पाई है. उम्मीद जताई जा रही है कि फिल्म पहले हफ्ते 56-57 करोड़ रुपये बटोरने में कामयाब हुई. बता दें, Stree 20 करोड़ रुपये के बजट में बनी है.
'प्यार न हुआ तुम्हारा, का एग्जाम हो गया', पढ़ें ऐसे 10 फनी डायलॉग..
'स्त्री' में हॉरर और कॉमेडी का परफेक्ट कॉकटेल दर्शकों को देखने को मिला है. आमतौर पर इस जॉनर की फिल्मों दर्शकों को निराश करती आई हैं, लेकिन निर्देशक अमर कौशिक ने साबित कर दिया कि वह हॉरर और कॉमेडी की छौंक परफेक्ट तरीके से लगाकर दर्शकों को परोस सकते हैं. राजकुमार राव फिल्म में दर्जी की भूमिका में हैं, उन्होंने अपने किरदार में जान डाल दी है.जकुमार राव और श्रद्धा कपूर की 'स्त्री' में कॉमेडी के साथ ही हॉरर का तगड़ा छौंक है और इसे लेकर पॉजिटिव रिव्यू आ रहे हैं. अमर कौशिक का निर्देशन कमाल का है, शुरू से आखिरी तक फिल्म आपको बांधे रखेगी. कहानी में नयापन है. इसके डायलॉग्स और कॉमिक पंच इतने शानदार है कि ढाई घंटे का वक्त चुटियों में निकल जाएगा. दिल्ली: शिक्षक दिवस ( ' ) के मौके पर गूगल ने इंडिया में डूडल बनाया है. भारत में गुरु और शिष्य के रिश्ते को दिखलाने के लिए बेहद ही खास दिन माना गया है. पूरे देशभर में शिष्य अपने गुरु को न सिर्फ बधाई देते हैं बल्कि उनसे आशीर्वाद लेते हैं. इंडिया में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने के पीछे एक रोचक तथ्य है. आज के ही दिन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ( डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर मनाए जाने वाले शिक्षक दिवस का जहां-स्कूल कॉलेजों में काफी महत्व रहता है, वहीं बॉलीवुड फिल्मों में भी टीचर्स के कई अंदाज देखने को मिले हैं. सुष्मिता सेन, रानी मुखर्जी और चित्रांगदा सिंह जैसी टीचर्स तो दर्शकों के जेहन में हमेशा ताजा रहती हैं. डॉ. सर्वपल्ली कहना था कि जहां कहीं से भी कुछ सीखने को मिले उसे अपने जीवन में उतार लेना चाहिए. वह पढ़ाने से ज्यादा छात्रों के बौद्धिक विकास पर जोर देने की बात करते थे. वह पढ़ाई के दौरान काफी खुशनुमा माहौल बनाकर रखते थे.n) का जन्म हुआ था, जिस वजह से इसी दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाना लगा. 1962 में जन्मे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक जाने माने विद्वान, शिक्षक, दार्शनिक और नेता थे.
. सर्वपल्ली शिक्षा के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य किये, जिसकी वजह से उन्हें यह उपाधि दी गई. डॉ. राधाकृष्णन की याद में ही टीचर्स डे ( 's का वाक्या है. भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन चीन के दौरे पर गए थे. उस वक्त माओ चीन के प्रसिद्ध नेता थे, या यूं कहें कि उस देश की राजनीति इन्हीं के इर्द-गिर्द घुम रही थी. माओ ने राधाकृष्णन को मिलने के लिए अपने घर पर आमंत्रित किया. राधाकृष्णन कुछ भारतीय अधिकारियों के साथ माओ से मिलने उनके घर चुग नान हाई पहुंचे. यहां माओ उनकी अगवानी के लिए अपने आंगन में खड़े थे. आंगन में दाखिल होते ही दोनों नेताओं ने आपस में हाथ मिलाया. इसके बाद राधाकृष्णन ने माओ के गाल को थपथपा दिए. इस बर्ताव पर माओ के कुछ बोलने से पहले राधाकृष्णन ने ऐसी बात कह दी कि शायद वे चाहकर भी कुछ नहीं कह सके. गाल थपथपाने के बाद सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने माओ से कहा, 'अध्यक्ष महोदय, परेशान मत होइए. मैंने यही स्टालिन और पोप के साथ भी किया है.' ) का आयोजन होता है. डॉ. राधाकृष्णन भारत के पहले उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे. उन्हें 1954 में भारत रत्न से नवाजा गया था. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 27 बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया था.
मालूम हो कि, 'स्त्री' ने रिलीज के पहले दिन 6.65 करोड़, शनिवार को 10.50 करोड़, रविवार को फिल्म के कलेक्शन में भारी उछाल देखने को मिली और इसने 14.25 करोड़ रुपये बटोरे. पहले वीकएंड पर फिल्म ने 31.40 करोड़ रुपये का कारोबार किया और सोमवार को इसकी कमाई 8.50 करोड़ रुपये रही और मंगलवार को फिल्म के खाते में 5.75 करोड़ रुपये आए. फिल्म शुरुआती 5 दिनों में 47 करोड़ रुपये का बिजनेस कर पाई है. उम्मीद जताई जा रही है कि फिल्म पहले हफ्ते 56-57 करोड़ रुपये बटोरने में कामयाब हुई. बता दें, Stree 20 करोड़ रुपये के बजट में बनी है.
'प्यार न हुआ तुम्हारा, का एग्जाम हो गया', पढ़ें ऐसे 10 फनी डायलॉग..
'स्त्री' में हॉरर और कॉमेडी का परफेक्ट कॉकटेल दर्शकों को देखने को मिला है. आमतौर पर इस जॉनर की फिल्मों दर्शकों को निराश करती आई हैं, लेकिन निर्देशक अमर कौशिक ने साबित कर दिया कि वह हॉरर और कॉमेडी की छौंक परफेक्ट तरीके से लगाकर दर्शकों को परोस सकते हैं. राजकुमार राव फिल्म में दर्जी की भूमिका में हैं, उन्होंने अपने किरदार में जान डाल दी है.जकुमार राव और श्रद्धा कपूर की 'स्त्री' में कॉमेडी के साथ ही हॉरर का तगड़ा छौंक है और इसे लेकर पॉजिटिव रिव्यू आ रहे हैं. अमर कौशिक का निर्देशन कमाल का है, शुरू से आखिरी तक फिल्म आपको बांधे रखेगी. कहानी में नयापन है. इसके डायलॉग्स और कॉमिक पंच इतने शानदार है कि ढाई घंटे का वक्त चुटियों में निकल जाएगा. दिल्ली: शिक्षक दिवस ( ' ) के मौके पर गूगल ने इंडिया में डूडल बनाया है. भारत में गुरु और शिष्य के रिश्ते को दिखलाने के लिए बेहद ही खास दिन माना गया है. पूरे देशभर में शिष्य अपने गुरु को न सिर्फ बधाई देते हैं बल्कि उनसे आशीर्वाद लेते हैं. इंडिया में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने के पीछे एक रोचक तथ्य है. आज के ही दिन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ( डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर मनाए जाने वाले शिक्षक दिवस का जहां-स्कूल कॉलेजों में काफी महत्व रहता है, वहीं बॉलीवुड फिल्मों में भी टीचर्स के कई अंदाज देखने को मिले हैं. सुष्मिता सेन, रानी मुखर्जी और चित्रांगदा सिंह जैसी टीचर्स तो दर्शकों के जेहन में हमेशा ताजा रहती हैं. डॉ. सर्वपल्ली कहना था कि जहां कहीं से भी कुछ सीखने को मिले उसे अपने जीवन में उतार लेना चाहिए. वह पढ़ाने से ज्यादा छात्रों के बौद्धिक विकास पर जोर देने की बात करते थे. वह पढ़ाई के दौरान काफी खुशनुमा माहौल बनाकर रखते थे.n) का जन्म हुआ था, जिस वजह से इसी दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाना लगा. 1962 में जन्मे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक जाने माने विद्वान, शिक्षक, दार्शनिक और नेता थे.
. सर्वपल्ली शिक्षा के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य किये, जिसकी वजह से उन्हें यह उपाधि दी गई. डॉ. राधाकृष्णन की याद में ही टीचर्स डे ( 's का वाक्या है. भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन चीन के दौरे पर गए थे. उस वक्त माओ चीन के प्रसिद्ध नेता थे, या यूं कहें कि उस देश की राजनीति इन्हीं के इर्द-गिर्द घुम रही थी. माओ ने राधाकृष्णन को मिलने के लिए अपने घर पर आमंत्रित किया. राधाकृष्णन कुछ भारतीय अधिकारियों के साथ माओ से मिलने उनके घर चुग नान हाई पहुंचे. यहां माओ उनकी अगवानी के लिए अपने आंगन में खड़े थे. आंगन में दाखिल होते ही दोनों नेताओं ने आपस में हाथ मिलाया. इसके बाद राधाकृष्णन ने माओ के गाल को थपथपा दिए. इस बर्ताव पर माओ के कुछ बोलने से पहले राधाकृष्णन ने ऐसी बात कह दी कि शायद वे चाहकर भी कुछ नहीं कह सके. गाल थपथपाने के बाद सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने माओ से कहा, 'अध्यक्ष महोदय, परेशान मत होइए. मैंने यही स्टालिन और पोप के साथ भी किया है.' ) का आयोजन होता है. डॉ. राधाकृष्णन भारत के पहले उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे. उन्हें 1954 में भारत रत्न से नवाजा गया था. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 27 बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया था.
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