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देश के इस स्टेशन पर पहली बार मिले दोनों, और भारतीय राजनीति में बन गये एक नाम 'अटल-आडवाणी'

और लालकृष्णआडवाणी ने भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की थी. इसके बाद तो भारतीय राजनीति में ये दोनों एक नाम हो गये 'अटल-आडवाणी'. लेकिन ऐसा नहीं है कि बीजेपी की स्थापना के समय ही दोनों साथ आये थे. बीजेपी की स्थापना के काफी पहले दोनों नेता राजनीति में आ चुके थे. दोनों ही आरएसएस के प्रचारक के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. अटल जी भी पत्रकारिता से जुड़े थे और लालकृष्ण आडवाणी भी. अटल जी अपने भाषण के दम पर राजनीति में बहुत ही तेजी से जगह बना रहे थे तो आडवाणी राजस्थान के कोटा में संघ के प्रचारक के तौर पर काम रहे थे. जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी के भाष

णशैली से काफी प्रभावित थे. यह दोनों चाहते थे कि अटल बिहारी वाजपेयी किसी तरह संसद पहुंच जाएं ताकि उनके भाषणों को पूरे देश की जनता सुन पाये.किन अटल बिहारी वाजपेयी की मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी से कैसे हुई यह कहानी भी बहुत रोचक है. अटल जी एक बार सहयोगी के तौर पर पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ ट्रेन से मुंबई जा रहे थे. मुखर्जी कश्मीर के मुद्दे पर पूरे देश का दौरा कर रहे थे. लालकृष्ण आडवाणी कोटा में प्रचारक थे. उनको पता लगा कि उपाध्याय जी इस स्टेशन से गुजरने वाले हैं तो वह मिलने आ गये. वहीं पर मुखर्जी ने दोनों की मुलाकात करवाई थी.

लालकृष्ण आडवाणी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनका भाषण सुनने के बाद तो उनको लगा कि वह गलत पार्टी में आ गये हैं. आडवाणी हमेशा इस बा बचावकर्मी बच्चे की तलाश के अभियान में जोरशोर से जुटे हुए थे. योशिकी फुजिमोतो रविवार की सुबह यामागुची क्षेत्र में लापता हो गया था. वह अपने भाई और दादा के साथ टहलने निकला था. उसकी तलाश में चलाया गया अभियान देश भर में सुर्खियां बना. 

पुलिस और स्थानीय लोगों ने बच्चे की तलाश में पूरा जंगल छान मारा.त को स्वीकारते रहे हैं कि वह अटल जी के भाषण सुनकर हमेशा कुंठित हो जाते थे. आपको बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस समय दिल्ली में एम्स में भर्ती हैं और उनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है. मिली जानकारी के मुताबिक 8 डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है. जापान के पश्चिमी हिस्से में एक जंगल में लापता हुआ दो साल का एक बच्चा करीब तीन दिन बाद सकुशल मिल गया. बताया जाता है कि बच्चा तीन दिन तक सिर्फ नदी का पानी पीकर जीवित रहा.
इस बीच, बुधवार को सुबह 78 वर्षीय एक बुजुर्ग की नजर बच्चे पर पड़ी. हारुओ ओबाता ने स्थानीय टेलीविजन को बताया, ‘‘बच्चा एक चट्टान पर बैठा था. उसने अपने नन्हे नंगे पैरों को हल्के पानी में डुबो रखा था.’’ जापान में इतनी भीषण गर्मी के मौसम में भी बच्चे का जीवित बचे रहना किसी चमत्कार से कम नहीं है.

टिप्पणियां
जंगल के इस क्षेत्र में छोटी -बड़ी कई नदियां हैं और कुछ मीडियाकर्मियों का मानना है कि इन्हीं नदियों की बदौलत बच्चे की जान बची. फुजिमोतो सोमवार को ही दो साल का हुआ है. उसका उपचार जिस स्थानीय अस्पताल में चल रहा है, उसके अधिकारी हिरोयुकी निशिहारा ने बताया, ‘‘उसके शरीर पर कहीं भी चोट के निशान नहीं हैं. कुछ खरोंच हैं और थोड़ा बहुत डिहाइड्रेशन हुआ है.’’  

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